09 March 2011

अपनी सार्थकता की तलाश है । गिरिजा कुलश्रेष्ठ


सन 1998 में प्रकाशित व पुरस्कृत कविता " उनका आना " की ( ग्वालियर निवासी ) कवियित्री व लेखिका सुश्री गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी जिये हुये यथार्थ की तरह जीवन के विभिन्न रंगों को अपनी तूलिका से सहज भाव से उकेरती जाती है ।..पर ...तुमने तो कहा था कि । तुम मुझसे प्रेम करते हो ।(और)..बेमन ही लिखते रहे तुम ।..मानों स्त्री के ह्रदय भावों को खोलकर रख देते हैं ।(आगे)..मिल जाना है । रख कर भूला हुआ कोई नोट । किताबें पलटते हुए । अचानक ही ।..ये नायिका की नायक के आने के बाद की खुशी बयान करती है । इस तरह गिरिजा जी को पढना मानों जीवन को पढना है । और इस तरह "सार्थकता की तलाश"  वाले शब्द उनकी सटीक अभिव्यक्ति ही हैं । आईये देखें सुश्री । गिरिजा जी अपने बारे में क्या बता रहीं है । .. जीवन के पाँच दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ । अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यगृता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ । फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है । BLOG..ये मेरा जहाँ

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